जीवन में संकट अचानक आता हुआ दिखाई देता है। कभी परिस्थितियाँ हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं, कभी कोई संबंध कठिन परीक्षा बन जाता है और कभी भविष्य को लेकर भय मन को घेर लेता है। ऐसे समय में मनुष्य अक्सर पूछता है—“भगवान कहाँ हैं?”
लेकिन भक्ति की दृष्टि से देखें तो भगवान केवल संकट के समय ही हमारे साथ नहीं होते। वे संकट आने से पहले संकेत देते हैं, संकट के समय भीतर से संभालते हैं और संकट के बाद हमें उससे आगे बढ़ने का मार्ग दिखाते हैं।
कई बार जीवन में आने वाली कठिनाई से पहले हमें छोटे-छोटे संकेत मिलते हैं। हमारा अंतर्मन किसी निर्णय को लेकर सावधान करता है, कोई संत-वचन हमें सोचने पर मजबूर करता है या परिस्थितियाँ हमें किसी गलत दिशा से वापस आने का अवसर देती हैं।
लेकिन हम अक्सर अपनी इच्छाओं और अहंकार में उन संकेतों को अनदेखा कर देते हैं।
इसलिए हर परिस्थिति में केवल यह मत देखिए कि “मुझे क्या चाहिए?”
कभी यह भी पूछिए—“भगवान मुझे क्या समझाना चाहते हैं?”
जब संकट सामने आ जाता है, तब हमारी सबसे बड़ी परीक्षा बाहर की परिस्थिति नहीं, बल्कि हमारा विश्वास होता है।
ऐसे समय में भगवान हमेशा समस्या को तुरंत समाप्त कर दें, यह आवश्यक नहीं। कई बार वे समस्या के बीच हमें धैर्य, विवेक, सही व्यक्ति, सही मार्ग और भीतर से आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं।
जिस प्रकार अंधेरी रात में एक छोटा-सा दीपक पूरा रास्ता नहीं दिखाता, लेकिन अगला कदम उठाने के लिए पर्याप्त प्रकाश देता है, उसी प्रकार भगवान की कृपा भी हमें संकट के बीच अगला सही कदम उठाने की शक्ति देती है।
संकट समाप्त होने के बाद हम अक्सर पीछे मुड़कर देखते हैं और समझते हैं कि जिस घटना को उस समय केवल दुःख समझ रहे थे, उसने हमें कुछ महत्वपूर्ण सिखाया।
कभी उसने हमारा अहंकार तोड़ा, कभी हमारी दिशा बदली, कभी हमें किसी गलत मार्ग से बचाया और कभी भगवान के प्रति हमारे विश्वास को और गहरा कर दिया।
इसलिए हर कठिन परिस्थिति के बाद स्वयं से पूछिए—
“इस संकट ने मुझे भगवान के और निकट कैसे किया?”
भगवान पर विश्वास करने का अर्थ यह नहीं कि जीवन में कभी संकट नहीं आएगा। इसका अर्थ है—
संकट आएगा तो मैं अकेला नहीं हूँ।
परिस्थितियाँ हमारे नियंत्रण में हों या न हों, यदि हमारा विश्वास भगवान में अटूट है तो हम भय के बजाय श्रद्धा और धैर्य के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
इसलिए जब जीवन में अगली बार कोई कठिन परिस्थिति आए, तो घबराने के बजाय एक क्षण रुकिए और भगवान से कहिए—
“हे प्रभु! यदि यह संकट मेरे लिए कोई संकेत है, तो मुझे समझने की बुद्धि दीजिए; यदि यह मेरी परीक्षा है, तो इसे पार करने की शक्ति दीजिए; और यदि यह मेरी यात्रा का कोई नया मार्ग है, तो मुझे सही दिशा दिखाइए।”
क्योंकि भगवान संकट से पहले संकेत देते हैं, संकट में साथ देते हैं और संकट के पार भी पहुंचाते हैं। 🙏
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