
✍️ Nimai Bandhu Das
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Lyrics
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
महल बनाए बड़े-बड़े, पर मन का कोना सूना है।
भीड़ बहुत है बाहर पर, भीतर का दर्द दुगुना है॥
तन को तो पहनाए रेशम, आत्मा भूखी ही सो जाती है।
हर रात को दिल के कोने से, बस एक ही प्रश्न ये आता है—
"क्या बस इतना ही जीवन है, जो आ कर यूँ ही खो जाए?"
जब तक ना मिले तेरा ये प्रेम, आत्मा सुप्रसीदति ना हो पाए॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
कोई शर्त नहीं, कोई सौदा नहीं, भक्ति तो निष्कपट नाता है।
ठाकुर को छप्पन भोग नहीं, शबरी का जूठा भाता है॥
हम माँग रहे संसार तुझसे, पर तू तो हृदय का स्वामी है।
क्या देंगे तुमको लड्डू-धन, तू तो प्रभु अंतर्यामी है॥
हाथों में वस्तुएँ नहीं प्रभु! अब हाथ तुम्हारा मिल जाए।
जब तक ना मिले तेरा ये प्रेम, आत्मा सुप्रसीदति ना हो पाए॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
चाहे आए तूफ़ान कोई, या हँसकर पीना पड़े ज़हर।
मीरा सी मस्ती घट में हो, थमे नहीं भक्ति की ये लहर॥
प्रह्लाद सरीखा अटूट यक़ीन, जो खंभे में भी तुझको पाए।
सुख में भी तेरा शुकराना, दुःख में भी मुख ना मुड़ पाए॥
परिस्थिति चाहे जो भी हो, बस तेरा नाम ना छूट पाए।
जब तक ना मिले तेरा ये प्रेम, आत्मा सुप्रसीदति ना हो पाए॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
कर्तव्य निभाएँ दुनिया के, पर तुझसे नाता जोड़ रखें।
इस जग की झूठी आशा से, अब मुख को अपने मोड़ रखें॥
नदी जैसे सागर में मिलकर, अपनी पहचान गँवाती है।
यह जीवात्मा भी गोविंद! तेरे चरणों में ही सुख पाती है॥
अब और नहीं कुछ पाना है, मेरा खोया सम्बंध मिल जाए।
जब तक ना मिले तेरा ये प्रेम, आत्मा सुप्रसीदति ना हो पाए॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
हे नाथ! मैं आपका ही हूँ, और आप मेरे हैं...
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The lyrics and musical composition of this bhajan have been created with devotion for the pleasure of Shri Shri Radha Krishna. You are welcome to sing, share, and distribute this bhajan for personal, devotional, and non-commercial purposes, provided proper credit is given to the author.
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About this bhajan
भक्ति किसी लेन-देन या बाहरी प्रदर्शन का नाम नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम, पूर्ण समर्पण और भगवान के चरणों में शरणागति का मार्ग है।
शबरी की सरल भक्ति, प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और मीराबाई के निष्काम प्रेम से प्रेरित यह भजन हमें याद दिलाता है कि जीवन की हर परिस्थिति में श्रीकृष्ण का नाम ही हमारा सच्चा आश्रय है। इसका संदेश है कि संसार के कर्तव्यों का पालन करते हुए भी हृदय सदैव भगवान से जुड़ा रहे, क्योंकि आत्मा की वास्तविक शांति और तृप्ति केवल उनके प्रेम में ही प्राप्त होती है।
मुख्य संदेश:
"जब तक श्रीकृष्ण का प्रेम प्राप्त नहीं होता, तब तक आत्मा को वास्तविक तृप्ति और शांति नहीं मिल सकती।"
रचना एवं गीत: Nimai Bandhu Das
शैली: कृष्ण भजन • भक्ति संगीत • आध्यात्मिक गीत
भाषा: हिन्दी