बस तुम ही हमारे अपने हो

Bas Tum Hi Hamare Apne Ho

Krishna Bhajan

Released on 4th July 2026

✍️ Nimai Bandhu Das

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Lyrics

जो रेत के महलों में... हम ढूँढ़ रहे थे ठिकाना, वो छूट गया सब पीछे... अब छोड़ दिया जग ताना। हे नाथ! जनम के साथी... बस तुम ही हमारे अपने, इस झूठे जगत के छूटे... सब काँच के जैसे सपने।... Read More

हरि बोल... हरि बोल... हरि बोल... हरि बोल...

केशव कृष्ण माधव... हरि बोल... हरि बोल...


था गर्व जिन्हें वैभव पर... वो राख में बदल रहे हैं,

जिन रिश्तों को अपना माना... वो हाथ से फिसल रहे हैं।

ना रिश्ते है, ना नाते है... ना धन-दौलत की माया है,

इस जीव के साथ तो केवल... प्रभु! तेरी दया की छाया है।


जग रूठे तो रूठने दो... मेरी आस ना तुमसे टूटे,

हर साँस में नाम तुम्हारा... अब और ना कोई लूटे।


हरि बोल... हरि बोल... हरि बोल... हरि बोल...

संकर्षण देव नारायण... हरि बोल... हरि बोल...


चित्रकेतु का जैसे तोड़ा... तुमने वो मोह का धागा,

हे गोविंद! दया कर दो... मेरा सोया भाग्य अब जागा।

मिट्टी का पुतला मिट्टी में... एक दिन तो मिल ही जाना है,

इस जीवन की नैया को... अब तेरे पार लगाना है।


तुम आदि हो, तुम अंत हो... तुम ही हो हमारे स्वामी,

लो सौंप दिया जीवन तुमको... हे घट-घट अंतरयामी!


हरि बोल... हरि बोल... हरि बोल... हरि बोल...

राधा रमण गोपीवल्लभ... हरि बोल... हरि बोल...


हरे कृष्ण हरे कृष्ण... कृष्ण कृष्ण हरे हरे...

हरे राम हरे राम... राम राम हरे हरे...

हरे कृष्ण हरे कृष्ण... कृष्ण कृष्ण हरे हरे...

हरे राम हरे राम... राम राम हरे हरे...


प्रभु तुम ही हमारे... अपने हो...

बस तुम ही... हमारे... अपने हो...

हरि बोल... हरि बोल... हरि बोल... हरि बोल...

जय राधा माधव... हरि बोल... हरि बोल

© 2026 Nimai Bandhu Das. All Rights Reserved.

The lyrics and musical composition of this bhajan have been created with devotion for the pleasure of Shri Shri Radha Krishna. You are welcome to sing, share, and distribute this bhajan for personal, devotional, and non-commercial purposes, provided proper credit is given to the author.

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About this bhajan

बस तुम ही हमारे अपने हो" एक हृदयस्पर्शी कृष्ण भजन है, जो वैराग्य, शरणागति और हरिनाम-स्मरण की दिव्य भावना को अभिव्यक्त करता है। यह भजन श्रोता को संसार की क्षणभंगुरता का बोध कराते हुए भगवान श्रीकृष्ण के साथ जीव के शाश्वत संबंध का अनुभव कराता है।... Read More

भजन में यह संदेश दिया गया है कि धन, वैभव, प्रतिष्ठा और सांसारिक संबंध समय के साथ बदल जाते हैं, परंतु भगवान की करुणा, उनकी शरण और उनका नाम ही जीव का वास्तविक और नित्य आश्रय है। राजा चित्रकेतु के प्रसंग के माध्यम से यह भी दर्शाया गया है कि भगवान कभी-कभी हमारे मोह के बंधनों को तोड़कर हमें अपने वास्तविक कल्याण की ओर अग्रसर करते हैं।


धीमे, गंभीर और भावपूर्ण आरंभ से लेकर अंत में आनंदमय हरे कृष्ण महा-मंत्र संकीर्तन तक, यह भजन वैराग्य से भक्ति और भक्ति से पूर्ण आत्मसमर्पण की आध्यात्मिक यात्रा का सुंदर चित्रण करता है।


रचना एवं गीत: Nimai Bandhu Das

शैली: कृष्ण भजन • भक्ति संगीत • आध्यात्मिक गीत वैराग्य एवं शरणागति-प्रधान रचना

भाषा: हिन्दी

इस भजन का आध्यात्मिक आधार

यदि आप इस भजन में वर्णित राजा चित्रकेतु की कथा, संसार की अस्थिरता, वैराग्य, शरणागति तथा भगवान के साथ जीव के शाश्वत संबंध को शास्त्रीय प्रमाणों सहित विस्तार से समझना चाहते हैं, तो निम्न प्रवचन अवश्य देखें: