हे कृष्ण! ऐसा राग दे दो

Hey Krishna Aisa Raag De Do

Krishna Bhajan

Released on 28th June 2026

✍️ Nimai Bandhu Das

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Lyrics

हे कृष्ण! ऐसा राग दे दो... मुझे सच्चा वैराग्य दे दो। संसार मेरा छूटे न छूटे... मन में अपना अनुराग दे दो।... Read More

हे कृष्ण! ऐसा राग दे दो...

मन में अपना अनुराग दे दो...

हे कृष्ण! ऐसा राग दे दो...


काम, क्रोध, मद, लोभ हटें सब,

मन का यह संताप मिटे सब।

भीतर ऐसी प्यास जगा दो,

नाम-सुमिरन में मन रमा दो। 


हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥


कर्तव्य-पथ पर चलता रहूँ मैं,

तेरा ही नाम जपता रहूँ मैं।

संसार के रंग फीके लगें सब, 

भक्ति का ऐसा अमिट राग दे दो। 


मन में अपना अनुराग दे दो...

हे कृष्ण! ऐसा राग दे दो…


हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥


न ज्ञान है, न ध्यान है मुझमें,

न योग है, न साधना कोई।

बस एक तेरा नाम सहारा,

तेरे बिना अब कौन हमारा।

हाथ पकड़ लो, थाम लो मुझको,

अपनी शरण में वास दे दो। 


मन में अपना अनुराग दे दो...

हे कृष्ण! ऐसा राग दे दो...


रसना से गूँजे बस तेरी ही गाथा,

चरणों में सदा झुका रहे मेरा माथा। 

वाणी में अपना ओज दे दो,

हृदय में भक्ति का प्रकाश दे दो...


हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥


मन में अपना अनुराग दे दो...

हे कृष्ण! ऐसा राग दे दो…

मुझे... सच्चा वैराग्य दे दो…

© 2026 Nimai Bandhu Das. All Rights Reserved.

The lyrics and musical composition of this bhajan have been created with devotion for the pleasure of Shri Shri Radha Krishna.

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About this bhajan

"हे कृष्ण! ऐसा राग दे दो" एक हृदयस्पर्शी प्रार्थना है, जिसमें एक भक्त भगवान श्रीकृष्ण से संसार के प्रति नहीं, बल्कि उनके श्रीचरणों के प्रति अनुराग और संसार के क्षणभंगुर आकर्षणों से सच्चे वैराग्य की याचना करता है।... Read More

इस भजन का संदेश है कि वास्तविक वैराग्य संसार को छोड़ने में नहीं, बल्कि संसार में अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए मन को सदैव भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में लगाए रखने में है। भक्त प्रभु से प्रार्थना करता है कि उसके हृदय से काम, क्रोध, मद और लोभ जैसे विकार दूर हों तथा हरिनाम-स्मरण में उसका मन सदा रम जाए।

भजन का प्रत्येक पद हमें यह स्मरण कराता है कि भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए केवल विद्वत्ता, योग या कठोर साधना ही आवश्यक नहीं है। यदि हृदय में निष्कपट प्रेम, विनम्रता और पूर्ण शरणागति हो, तो भगवान स्वयं भक्त का हाथ थाम लेते हैं। यही भाव इस भजन की आत्मा है।

भजन के मध्य और अंत में गूँजता हरे कृष्ण महामंत्र इस प्रार्थना को और अधिक मधुर एवं भावपूर्ण बना देता है तथा प्रत्येक श्रोता को नाम-संकीर्तन के आनंद में सहभागी होने के लिए प्रेरित करता है।

यदि यह भजन आपके हृदय में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, नाम-जप की प्रेरणा और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने का उत्साह उत्पन्न करे, तो यही इस विनम्र रचना का उद्देश्य है।

रचना एवं गीत: निमाई बंधु दास

भाषा: हिन्दी

विषय: श्रीकृष्ण भक्ति, अनुराग, वैराग्य, शरणागति, नाम-स्मरण एवं भक्ति योग।