नियमों से नहीं, प्रेम से रीझते सांवरिया

Niyamon Se Nahi Prem Se Reejhte Sanwariya

Krishna Bhajan

Released on 14th July 2026

✍️ Nimai Bandhu Das

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Lyrics

नियमों से नहीं, तुम प्रेम से रीझते सांवरिया... छप्पन भोग छोड़, तुम खिचड़ी पे भीजते सांवरिया... नियमों से नहीं, तुम प्रेम से रीझते सांवरिया... Read More

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥


न नहाने का ठिकाना, न कोई मंत्र जाना,

भोली कर्मा का बस, तू ही था ठिकाना।

तीनों लोकों के स्वामी, प्रेम से आए सांवरिया... 

कर्मा के हाथों से, कौर लेते सांवरिया... 


नियमों से नहीं, तुम प्रेम से रीझते सांवरिया...


ज्ञानी भी न पा सके, ध्यानी भी न पा सके।

वेदों में खोजा बहुत, फिर भी न पा सके। 

मैया के उस प्रेम में, बँध गए सांवरिया…

ब्रह्मांड के नायक होकर भी, प्रेमाश्रु से भीगते सांवरिया... 


नियमों से नहीं, तुम प्रेम से रीझते सांवरिया…


हम भी खड़े हैं, सुध-बुध भूल के कान्हा।

तेरे चरणों में ही माना, जीवन का ठिकाना।

ज्ञान भी तू ही मेरा, आधार भी तू ही है। 

भक्ति की डोरी से, मेरे मन को बाँधते सांवरिया...


नियमों से नहीं, तुम प्रेम से रीझते सांवरिया...


हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥


सांवरिया...

सांवरिया...

सांवरिया...

जय जय श्री राधे...

जय जय श्री श्याम...

जय जय श्री राधे... श्याम...

© 2026 Nimai Bandhu Das. All Rights Reserved.

The lyrics and musical composition of this bhajan have been created with devotion for the pleasure of Shri Shri Radha Krishna. You are welcome to sing, share, and distribute this bhajan for personal, devotional, and non-commercial purposes, provided proper credit is given to the author.

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About this bhajan

"नियमों से नहीं, प्रेम से रीझते सांवरिया" एक भावपूर्ण कृष्ण-भक्ति भजन है, जो यह दिव्य सत्य प्रकट करता है कि भगवान श्रीकृष्ण बाहरी नियमों, कर्मकांडों, विद्वता या वैभव से नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होते हैं।... Read More

भजन में भक्त कर्माबाई की सरल और निष्काम भक्ति का उल्लेख है, जिनकी प्रेमपूर्वक बनाई गई साधारण खिचड़ी को स्वयं भगवान ने स्वीकार किया। साथ ही माता यशोदा के वात्सल्य प्रेम का स्मरण कराया गया है, जिसमें सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के स्वामी श्रीकृष्ण भी एक माँ के स्नेह के आगे बंध जाते हैं। यह दर्शाता है कि भगवान का हृदय प्रेम से जीता जा सकता है, न कि केवल बाहरी आडंबरों से।

भजन का प्रत्येक पद साधक को यह प्रेरणा देता है कि यदि हृदय में सच्ची भक्ति, विनम्रता और समर्पण हो, तो भगवान स्वयं भक्त के जीवन में प्रकट होकर उसका प्रेम स्वीकार करते हैं।

अंत में महा-मंत्र संकीर्तन इस संदेश को और सशक्त बनाता है कि कलियुग में हरे कृष्ण महा-मंत्र का कीर्तन भगवान के प्रेम को प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावशाली साधन है।

यह भजन केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि अपने जीवन में प्रेममयी भक्ति, सरलता और भगवान पर पूर्ण आश्रय विकसित करने की प्रेरणा देने वाला एक आध्यात्मिक संदेश है।


रचना एवं गीत: Nimai Bandhu Das

शैली: कृष्ण भजन • भक्ति संगीत • प्रेम-भक्ति प्रधान • संकीर्तन शैली

भाषा: हिन्दी

🎙️इस भजन से संबंधित प्रवचन

यदि आप इस भजन में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम-स्वभाव, भक्त कर्माबाई की निष्कपट भक्ति, माता यशोदा के वात्सल्य प्रेम तथा "भगवान नियमों से नहीं, प्रेम से रीझते हैं" इस सिद्धांत को शास्त्रों के आधार पर विस्तार से समझना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए संबंधित प्रवचन अवश्य देखें।